ऋषि-मुनियों द्वारा हजारों वर्ष पूर्व वायरस और बैक्टीरिया जनित बीमारियों से लड़ने के लिए एक ऐसे रसायन का निर्माण किया गया, जिसे स्वर्ण प्राशन कहा जाता है. स्वर्ण प्राशन के सेवन से बच्चों का शारीरिक और बौद्धिक विकास बेहतर होता है.
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